वियतनाम के जलक्षेत्र में चीनी पोत के घुसने से बढ़ी तनातनी, अमेरिका ने किया अलर्ट

Saturday, July 20, 2019

  Showing of photos  
वियतनाम के जलक्षेत्र में चीनी पोत के घुसने से बढ़ी तनातनी, अमेरिका ने किया अलर्ट

हनोई: वियतनाम के हिस्से वाले दक्षिण चीन सागर में चीनी पोत घुसने से दोनों देशों के बीच तनातनी बढ़ गई है। वियतनामी विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीनी सर्वे पोत (एक तरह का रिसर्च पोत) हाइयांग डीजी 8 और उसके साथ चल रहे अन्य पोत वियतनाम के हिस्से वाले जलक्षेत्र में घुस गए थे।

इस घटना को लेकर वियतनाम ने चीन पर उसकी संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया। साथ ही दक्षिण चीन सागर में मौजूद चीनी सर्वे पोत को हटाने की मांग की है।

बता दें कि चीन समूचे दक्षिण सागर पर अपना दावा करता है। इसके चलते वियतनाम के साथ ही फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया आदि देशों के साथ उसकी तनातनी चलती रहती है। शुक्रवार को चीन की आलोचना करते हुए वियतनाम के विदेश मंत्रालय ने कहा, 'चीन का पोत पूरी तरह हमारे हिस्से में पड़ने वाले सागर में थे। इसे लेकर हमने चीन सरकार से कई बार बातचीत की और इस कदम का विरोध किया है।'

दूसरी तरफ चीन के विदेश मंत्रालय ने दक्षिण सागर में किसी पोत के होने की पुष्टि नहीं की है। साथ ही मंत्रालय ने वियतनाम को ऐसा कोई भी कदम उठाने से चेताया है, जिससे स्थिति और बिगड़ जाए।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जॉन बोल्टन ने कहा कि चीन के बर्ताव से हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता को खतरा उत्पन्न हो गया है। वह अपने दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसी देशों के साथ जोर-जबर्दस्ती वाला व्यवहार कर रहा है।

बोल्टन ने शुक्रवार को ट्विटर पर लिखा, 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संप्रभुता और स्वतंत्र आवाजाही का सम्मान करना अमेरिका और आसियान (एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस) का साझा मकसद है। चीन का अपने दक्षिण पूर्व एशियाई पड़ोसी देशों के साथ दबंगई वाला व्यवहार निंदनीय है। इससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को खतरा पैदा हो रहा है।'

बता दें कि विवादित चीन सागर में स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका निरंतर अभियान चलाता रहता है, जबकि चीन इसका विरोध करता है। वह लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। उसने क्षेत्र में कई कृत्रिम द्वीप विकसित कर दिए हैं। इन द्वीपों पर सैन्य साजो-सामान की तैनाती भी की है। चीन के इस कदम का अमेरिका समेत फिलीपींस और वियतनाम जैसे देश विरोध करते रहे हैं।