बुखार की भयावहता को भांपने में विफल रहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

Tuesday, June 25, 2019

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बुखार की भयावहता को भांपने में विफल रहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

: नई दिल्ली, नीलू रंजन। मुजफ्फरपुर में डेढ़ सौ बच्चों की मौत का कारण बने चमकी बुखार फैलने की असली वजह का अभी तक पता नहीं चल सका है। राज्य सरकार के हाथ पैर फूले हैं और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास अब तक बीमारी के महामारी बनने की वजहों की कोई ठोस रिपोर्ट नहीं है। सच्चाई यह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षव‌र्द्धन को एक सप्ताह बाद इसकी भयावहता का अहसास हुआ।

एक पखवाड़े पहले बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षव‌र्द्धन से मुलाकात कर हालात की जानकारी दी और केंद्रीय मदद की गुहार लगाई। इसके दो दिन बाद 11 जून को हर्षव‌र्द्धन ने हालात की समीक्षा की और एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञों के दल को 12 जून को मुजफ्फरपुर पहुंचने का आदेश दिया। लेकिन 13 जून को मंगल पांडेय ने फिर से हर्षव‌र्द्धन से मुलाकात की

हर्षव‌र्द्धन ने कोई ठोस कदम उठाने के बजाय राज्य सरकार को लोगों के बीच जागरुकता फैलाने, इसके लिए एनजीओ की मदद लेने, बीमार बच्चों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने का उपाय करने और बीमारी को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन को सक्रिय रूप से जोड़ने जैसे सुझाव दे दिये।

मंगल पांडेय से पहली मुलाकात के छह दिन बाद 15 जून को हर्षव‌र्द्धन को हालात की भयावहता का अहसास हुआ और उन्होंने खुद मुजफ्फरपुर जाकर हालात का जायजा लेने का फैसला लिया। जाहिर है तबतक बच्चों के हर दिन मरने का सिलसिला जारी रहा।

16 जून के मुजफ्फरपुर दौरे से लौटने के बाद 17 जून को हर्षव‌र्द्धन ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। जिसमें आइसीएमआर दिल्ली, निमहांस बेंगलुरू, राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय आहार संस्थान हैदराबाद, राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान पुणे, राष्ट्रीय महामारी संस्थान चेन्नई और एम्स के विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय टीम का गठन कर उन्हें मुजफ्फरपुर रवाना करने का फैसला हुआ। इसके साथ ही अलग-अलग जिलों में पांच वायरोलॉजीकल प्रयोगशाला खोलने का निर्णय हुआ।

यहीं नहीं, मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेमोरियल कालेज व अस्पताल की हालात और बच्चों के इलाज के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखकर लौटे हर्षव‌र्द्धन ने वहां केंद्र सरकार की मदद से 100 बिस्तरों वाले बच्चों के लिए आइसीयू स्थापित करने की घोषणा की। साथ ही मुजफ्फरपुर में उच्च स्तरीय अनुसंधान केंद्र खोलने का भी फैसला हुआ।

18 जून तक आते-आते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अहसास हो गया कि चमकी बुखार और उससे बच्चों की मौत के लिए कोई एक वजह जिम्मेदार नहीं है। बल्कि कई चीजें सामूहिक रूप से मिलकर जानलेवा साबित हो रही हैं।

इसके बाद एनसीडीसी, एम्स, आइसीएमआर, डब्ल्यूएचओ, सीडीसी, आईएपी, विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय व महिला व बाल विकास मंत्रालय के विशेषज्ञों के साथ-साथ मौसम विज्ञान, पोषण व कृषि विज्ञान के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक बड़ी उच्च स्तरीय समिति के गठन का ऐलान किया।

यह समिति खास मौसम में खास जगह पर फैलने वाली जानलेवा बीमारी के सभी पहलुओं की जांच कर उनसे निपटने के लिए विस्तृति रिपोर्ट देगी। लेकिन बड़े-बड़े फैसलों व वायदों के बीच मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत का सिलसिला जारी रहा।

इसको लेकर पूरे देश में फैले आक्रोश को देखते हुए 19 जून को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया, सफदरजंग और लेडी हार्डिग अस्पताल के 10 बाल रोग चिकित्सकों की टीम को मुजफ्फरपुर रवाना किया गया। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्र में बीमारी से पीडि़त लोगों की आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण टीमें भी रवाना की गईं।

इसके अलावा 10 नई एंबुलेंस और वरिष्ठ डाक्टरों व प्रशासनिक अधिकारियों की 16 नोडल टीमें भी तैनात करने का फैसला हुआ। दावा किया जा रहा है कि हर स्तर पर रोजाना केंद्र से भी मानीटरिंग की जा रही है लेकिन पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी हाथ खाली है।